शहर वालों को 100 और 120 के भाव टमाटर बेचने वाले इसको मेहनत से पैदा करने वाले किसानों को लागत मूल्य तक देने को तैयार नहीं l अधिकांश शहरों में जहाँ टमाटर १०० से १२० रूपए किलो बेचा जा रहा है, ग्रामीण किसान उचित मूल्य न मिलने से टमाटर नाले में फेक रहे हैं l सवाल यह है कि जब लागत मूल्य इतना कम है तो विक्रय मूल्य कैसे बढ़ रहा है, और कौन बढ़ा रहा है? पैदा करने वाला और खाने वाला- जब दोनों परेशान है तो फायदा किसको पहुँच रहा है? और सरकार क्या कर रही है?

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